Wednesday, June 29, 2011

गेहूं की अधपकी बालियाँ

सुबह से बारिश हो रही है.  आज रह रह कर बहुत दिल कर रहा था के कुछ लिखूं.  पर एक अरसे से मैंने कुछ नहीं लिखा है....कुछ भी नहीं.  पता नहीं मेरे साथ ये क्यूँ होता है, सांझ अक्सर मुझसे कहीं खो जाती है....इसीलिए इस ब्लॉग का नाम है.......  ;)

online आई थी ये सोचकर के आज यही लिख जाउंगी के सांझ को ढूँढने में मेरी मदद करो....पर फिर mailbox देखा तो दीपाली की email थी....मेरी एक पुरानी नज़्म भेजी थी उसने, जो मुझसे खो गई थी. हाँ, ये सही है, मेरा काफी कुछ सामान दीप के पास पड़ा है....मैंने खो दिया, उसने संभाल के रखा है......luv u baby....

तों आज दीप की मदद से....ये पुरानी सांझ......आप सबसे शेयर करती हूँ....




__________________________________________________________
वो सर्दियों का मौसम
और गेहूं की फसल
गेहूं की अधपकी बालियाँ
और सिगरी पे सुलगती आंच
वो काले हाथ, काले होंठ
और गेहूं की बालियों का
मीठा जायका

और तुमने कहा
"मैं न काले करुँगी अपने हाथ"
मैं एक एक बाली को मसलकर
पके दाने तुम्हें देता रहा
और तुम मासूम गिलहरी सी
वो दाने चुगती रही
ज्यूँ ही दाने ख़त्म हुए
तुम खिलखिलाकर उठी
"देखो, तुम तो और भी काले हो गए"
कहकर जोर से भागी तुम
मैं भी भागा था पीछे
के अब तो ये हाथ
तुमपर छाप कर ही मानूंगा

पर ना हाथ आई 
ना लौटी तुम
मैं अब तलक बैठा हूँ
राह तकते
उम्र मानो
बीत भी गयी
और ठहर भी गयी
ये हाथ
अब भी काले है

बहोत जिद्दी है ये
तुमसे जुदाई की कालिख
जब जब पसीना पोंछा
ये माथे पे लग गयी
जब जब मली हैं आँखें
ये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा??

30 comments:

  1. बहोत जिद्दी है ये
    तुमसे जुदाई की कालिख
    जब जब पसीना पोंछा
    ये माथे पे लग गयी
    जब जब मली हैं आँखें
    ये उनमें भी रह गयी
    अब ख्वाब अँधेरे हैं
    तकदीर भी सियाह
    कब आओगी........
    के जब मैं ही राख हो जाउगा??

    निशब्द कर दिया इन पंक्तियों ने

    ReplyDelete
  2. पर ना हाथ आई
    ना लौटी तुम
    मैं अब तलक बैठा हूँ
    राह तकते
    उम्र मानो
    बीत भी गयी
    और ठहर भी गयी
    ये हाथ
    अब भी काले है

    कितनी कशिश है पुकार मे …………फिर तो आना ही पडेगा ना।

    ReplyDelete
  3. chalo ab deepali to thanks bolna hi padega, aakhir uske karan hi to aaj aapke darshan huye....
    behtareen likha hai..(waise isme naya kya hai)...:P

    ReplyDelete
  4. kitnaa miss miss kiyaa tumko kyaa kahun..par is nazm se shikaayat door ho gai

    ReplyDelete
  5. जब जब मली हैं आँखें
    ये उनमें भी रह गयी
    अब ख्वाब अँधेरे हैं
    तकदीर भी सियाह
    कब आओगी........
    के जब मैं ही राख हो जाउगा??

    सांझ ,
    साँझ कभी खोती नहीं ... दिन की तपिश कितनी ही हो चली आती है शीतलता लिए ...
    बहुत दिन बाद आई हो ... पर आती रहा करो .. नज़्म हमेशा की तरह खूबसूरत ...

    प्यार सहित

    ReplyDelete
  6. आज अपनी पिछली पोस्ट पर तुम्हारा कमेन्ट देखकर तुम्हारे आने की आहट मिल गयी थी.. देखा तो इतनी ख़ूबसूरत नज़्म लिए तुम खड़ी थी..
    कालिख भी इतनी ख़ूबसूरत हो सकती है,ये मैं समझ सकता हूँ.. शायद रोदें का थिंकर भी किसी के इंतज़ार में होगा.. :)

    ReplyDelete
  7. कितनी खूब्सूरती से आपने सान्झ को शब्द दे दिये जो सोचने पर मज्बूर करते है.

    ReplyDelete
  8. बहोत जिद्दी है ये
    तुमसे जुदाई की कालिख
    जब जब पसीना पोंछा
    ये माथे पे लग गयी
    जब जब मली हैं आँखें
    ये उनमें भी रह गयी
    अब ख्वाब अँधेरे हैं
    तकदीर भी सियाह
    कब आओगी........
    के जब मैं ही राख हो जाउगा?

    गज़ब.

    आपकी कलम को सलाम.

    ReplyDelete
  9. वाह वाह वाह! कमाल की नज़्म है! बहुत खूब.
    देर आये दुरस्त आये!

    ReplyDelete
  10. bohot bohot shukriya aap sabhi ka....thanks a lot :):):)

    ReplyDelete
  11. ह्म्म्म्म……… ! अबकी आयी है वो साँझ ! :)

    नज़्म पर क्या कहूँ यारा !ये "Saanjh-touch" ही हो सकता है जो कालिख को भी इतनी खूबसूरती बख़्श दे !

    और दीपी को फ़्री-XL साइज के थैंक्स !

    Keep smiling n stay blessed !

    ReplyDelete
  12. thanks yaara....vaise tu bhi to gayab sa hi hai aajkal...

    ReplyDelete
  13. maine kaha tha na ki ye nazm milne ke baad tu extra khush ho jayegi :)
    teri ye chhoti chhoti khushiyan mujhe kitne bade sukoon deti hain.. love you too sweets..aur nazm ke liye main kuch nahi kahungi :p you know its my favo. muuuaaah

    ReplyDelete
  14. गहनता के साथ भावों को प्रस्तुत किया है आपने . बेहद खूबसूरत...

    ReplyDelete
  15. बहोत जिद्दी है ये
    तुमसे जुदाई की कालिख
    जब जब पसीना पोंछा
    ये माथे पे लग गयी
    जब जब मली हैं आँखें
    ये उनमें भी रह गयी
    अब ख्वाब अँधेरे हैं
    तकदीर भी सियाह
    कब आओगी........
    के जब मैं ही राख हो जाउगा??

    awaak kar diya tumne saanjhi,nazm ka isse behtareen ant nahi ho sakta tha,sach me kamal ka likha hai...........

    ReplyDelete
  16. जब जब पसीना पोंछा
    ये माथे पे लग गयी
    जब जब मली हैं आँखें
    ये उनमें भी रह गयी
    अब ख्वाब अँधेरे हैं
    तकदीर भी सियाह
    कब आओगी........
    के जब मैं ही राख हो जाउगा??

    WOW!!! Profound and beautiful!

    ReplyDelete
  17. kamaaal kar dia...bahot achhe..hats offf.kamaaal kar dia...bahot achhe..hats offf.

    ReplyDelete
  18. क्या कविता है जी
    पढकर मन कैसा कैसा हो गया है
    कुछ न कहना ही उचित होंगा .. बधाई

    आभार

    विजय

    कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html

    ReplyDelete
  19. कितना लम्बा इंतज़ार ...
    बहुत बढ़िया !

    ReplyDelete
  20. सांझ...आज तुम्हारा पूरा ब्लॉग पढ़ा, और कितना कुछ सहेज के रखने को बज पर शेयर भी किया...तुम बेहद, बेहद खूबसूरत लिखती हो.

    ReplyDelete
  21. सांझ कहाँ हो तुम चार महीने से कोई खबर नहीं ....सब ठीक है ना

    ReplyDelete
  22. puja ji....thanks a tonne for coming. kabse aapko padhti aayi hoon, aapko yahan dekhkar bohot bohot bohot accha laga hai. thanks :)

    sonal di...haan, sab thik hai, bas aa nahin paayi hoon. zindagi phir badalne lagi hai, priorities badal gayi hain....jald hi kuch naya hone wala hai so bas, in dinon aana nahin hota. yaad bohot aati hai aap sabki....koshish karungi aati rahoon :)

    ReplyDelete
  23. कहाँ गायब हो? जल्दी आओ, कुछ नया पोस्ट करो...हम कितनी बार यहाँ तक आ आ के लौटे हैं. अपने चाहने वालों को ऐसे तड़पाना अच्छी बात नहीं है :(

    तुम्हारे जिंदगी के खुशगवार बदलावों के लिए शुभकामनाएं...आती रहा करो!

    ReplyDelete
  24. oye yaara.......... !

    Naye saal ki dheron-dheron mubarakbaad ! Khuda tujhe muskurahaton ki lambi ladiyan bakshe !

    Stay blessed n Keep smiling !

    ReplyDelete
  25. mujhe laga yahan bhi kuch naya padhne ko milega... :(

    ReplyDelete
  26. http://kuchmerinazarse.blogspot.in/2012/05/blog-post_08.html

    ReplyDelete
  27. रश्मि दी ने आपकी ये पुरानी पोस्ट पढवाई................

    आप दोनों का शुक्रिया...

    अनु

    ReplyDelete