सुबह से बारिश हो रही है. आज रह रह कर बहुत दिल कर रहा था के कुछ लिखूं. पर एक अरसे से मैंने कुछ नहीं लिखा है....कुछ भी नहीं. पता नहीं मेरे साथ ये क्यूँ होता है, सांझ अक्सर मुझसे कहीं खो जाती है....इसीलिए इस ब्लॉग का नाम है....... ;)
online आई थी ये सोचकर के आज यही लिख जाउंगी के सांझ को ढूँढने में मेरी मदद करो....पर फिर mailbox देखा तो दीपाली की email थी....मेरी एक पुरानी नज़्म भेजी थी उसने, जो मुझसे खो गई थी. हाँ, ये सही है, मेरा काफी कुछ सामान दीप के पास पड़ा है....मैंने खो दिया, उसने संभाल के रखा है......luv u baby....
तों आज दीप की मदद से....ये पुरानी सांझ......आप सबसे शेयर करती हूँ....
__________________________________________________________
वो सर्दियों का मौसम
और गेहूं की फसल
गेहूं की अधपकी बालियाँ
और सिगरी पे सुलगती आंच
वो काले हाथ, काले होंठ
और गेहूं की बालियों का
मीठा जायका
और तुमने कहा
"मैं न काले करुँगी अपने हाथ"
मैं एक एक बाली को मसलकर
पके दाने तुम्हें देता रहा
और तुम मासूम गिलहरी सी
वो दाने चुगती रही
ज्यूँ ही दाने ख़त्म हुए
तुम खिलखिलाकर उठी
"देखो, तुम तो और भी काले हो गए"
कहकर जोर से भागी तुम
मैं भी भागा था पीछे
के अब तो ये हाथ
तुमपर छाप कर ही मानूंगा
पर ना हाथ आई
ना लौटी तुम
मैं अब तलक बैठा हूँ
राह तकते
उम्र मानो
बीत भी गयी
और ठहर भी गयी
ये हाथ
अब भी काले है
बहोत जिद्दी है ये
तुमसे जुदाई की कालिख
जब जब पसीना पोंछा
ये माथे पे लग गयी
जब जब मली हैं आँखें
ये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा??
online आई थी ये सोचकर के आज यही लिख जाउंगी के सांझ को ढूँढने में मेरी मदद करो....पर फिर mailbox देखा तो दीपाली की email थी....मेरी एक पुरानी नज़्म भेजी थी उसने, जो मुझसे खो गई थी. हाँ, ये सही है, मेरा काफी कुछ सामान दीप के पास पड़ा है....मैंने खो दिया, उसने संभाल के रखा है......luv u baby....
तों आज दीप की मदद से....ये पुरानी सांझ......आप सबसे शेयर करती हूँ....
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वो सर्दियों का मौसम
और गेहूं की फसल
गेहूं की अधपकी बालियाँ
और सिगरी पे सुलगती आंच
वो काले हाथ, काले होंठ
और गेहूं की बालियों का
मीठा जायका
और तुमने कहा
"मैं न काले करुँगी अपने हाथ"
मैं एक एक बाली को मसलकर
पके दाने तुम्हें देता रहा
और तुम मासूम गिलहरी सी
वो दाने चुगती रही
ज्यूँ ही दाने ख़त्म हुए
तुम खिलखिलाकर उठी
"देखो, तुम तो और भी काले हो गए"
कहकर जोर से भागी तुम
मैं भी भागा था पीछे
के अब तो ये हाथ
तुमपर छाप कर ही मानूंगा
पर ना हाथ आई
ना लौटी तुम
मैं अब तलक बैठा हूँ
राह तकते
उम्र मानो
बीत भी गयी
और ठहर भी गयी
ये हाथ
अब भी काले है
बहोत जिद्दी है ये
तुमसे जुदाई की कालिख
जब जब पसीना पोंछा
ये माथे पे लग गयी
जब जब मली हैं आँखें
ये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा??
बहोत जिद्दी है ये
ReplyDeleteतुमसे जुदाई की कालिख
जब जब पसीना पोंछा
ये माथे पे लग गयी
जब जब मली हैं आँखें
ये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा??
निशब्द कर दिया इन पंक्तियों ने
:):)
ReplyDeleteपर ना हाथ आई
ReplyDeleteना लौटी तुम
मैं अब तलक बैठा हूँ
राह तकते
उम्र मानो
बीत भी गयी
और ठहर भी गयी
ये हाथ
अब भी काले है
कितनी कशिश है पुकार मे …………फिर तो आना ही पडेगा ना।
chalo ab deepali to thanks bolna hi padega, aakhir uske karan hi to aaj aapke darshan huye....
ReplyDeletebehtareen likha hai..(waise isme naya kya hai)...:P
kitnaa miss miss kiyaa tumko kyaa kahun..par is nazm se shikaayat door ho gai
ReplyDeleteजब जब मली हैं आँखें
ReplyDeleteये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा??
सांझ ,
साँझ कभी खोती नहीं ... दिन की तपिश कितनी ही हो चली आती है शीतलता लिए ...
बहुत दिन बाद आई हो ... पर आती रहा करो .. नज़्म हमेशा की तरह खूबसूरत ...
प्यार सहित
आज अपनी पिछली पोस्ट पर तुम्हारा कमेन्ट देखकर तुम्हारे आने की आहट मिल गयी थी.. देखा तो इतनी ख़ूबसूरत नज़्म लिए तुम खड़ी थी..
ReplyDeleteकालिख भी इतनी ख़ूबसूरत हो सकती है,ये मैं समझ सकता हूँ.. शायद रोदें का थिंकर भी किसी के इंतज़ार में होगा.. :)
कितनी खूब्सूरती से आपने सान्झ को शब्द दे दिये जो सोचने पर मज्बूर करते है.
ReplyDeleteबहोत जिद्दी है ये
ReplyDeleteतुमसे जुदाई की कालिख
जब जब पसीना पोंछा
ये माथे पे लग गयी
जब जब मली हैं आँखें
ये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा?
गज़ब.
आपकी कलम को सलाम.
वाह वाह वाह! कमाल की नज़्म है! बहुत खूब.
ReplyDeleteदेर आये दुरस्त आये!
bohot bohot shukriya aap sabhi ka....thanks a lot :):):)
ReplyDeleteह्म्म्म्म……… ! अबकी आयी है वो साँझ ! :)
ReplyDeleteनज़्म पर क्या कहूँ यारा !ये "Saanjh-touch" ही हो सकता है जो कालिख को भी इतनी खूबसूरती बख़्श दे !
और दीपी को फ़्री-XL साइज के थैंक्स !
Keep smiling n stay blessed !
thanks yaara....vaise tu bhi to gayab sa hi hai aajkal...
ReplyDeletemaine kaha tha na ki ye nazm milne ke baad tu extra khush ho jayegi :)
ReplyDeleteteri ye chhoti chhoti khushiyan mujhe kitne bade sukoon deti hain.. love you too sweets..aur nazm ke liye main kuch nahi kahungi :p you know its my favo. muuuaaah
गहनता के साथ भावों को प्रस्तुत किया है आपने . बेहद खूबसूरत...
ReplyDeleteबहोत जिद्दी है ये
ReplyDeleteतुमसे जुदाई की कालिख
जब जब पसीना पोंछा
ये माथे पे लग गयी
जब जब मली हैं आँखें
ये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा??
awaak kar diya tumne saanjhi,nazm ka isse behtareen ant nahi ho sakta tha,sach me kamal ka likha hai...........
जब जब पसीना पोंछा
ReplyDeleteये माथे पे लग गयी
जब जब मली हैं आँखें
ये उनमें भी रह गयी
अब ख्वाब अँधेरे हैं
तकदीर भी सियाह
कब आओगी........
के जब मैं ही राख हो जाउगा??
WOW!!! Profound and beautiful!
kamaaal kar dia...bahot achhe..hats offf.kamaaal kar dia...bahot achhe..hats offf.
ReplyDeleteक्या कविता है जी
ReplyDeleteपढकर मन कैसा कैसा हो गया है
कुछ न कहना ही उचित होंगा .. बधाई
आभार
विजय
कृपया मेरी नयी कविता " फूल, चाय और बारिश " को पढकर अपनी बहुमूल्य राय दिजियेंगा . लिंक है : http://poemsofvijay.blogspot.com/2011/07/blog-post_22.html
कितना लम्बा इंतज़ार ...
ReplyDeleteबहुत बढ़िया !
सांझ...आज तुम्हारा पूरा ब्लॉग पढ़ा, और कितना कुछ सहेज के रखने को बज पर शेयर भी किया...तुम बेहद, बेहद खूबसूरत लिखती हो.
ReplyDeleteसांझ कहाँ हो तुम चार महीने से कोई खबर नहीं ....सब ठीक है ना
ReplyDeletepuja ji....thanks a tonne for coming. kabse aapko padhti aayi hoon, aapko yahan dekhkar bohot bohot bohot accha laga hai. thanks :)
ReplyDeletesonal di...haan, sab thik hai, bas aa nahin paayi hoon. zindagi phir badalne lagi hai, priorities badal gayi hain....jald hi kuch naya hone wala hai so bas, in dinon aana nahin hota. yaad bohot aati hai aap sabki....koshish karungi aati rahoon :)
:)
ReplyDeleteकहाँ गायब हो? जल्दी आओ, कुछ नया पोस्ट करो...हम कितनी बार यहाँ तक आ आ के लौटे हैं. अपने चाहने वालों को ऐसे तड़पाना अच्छी बात नहीं है :(
ReplyDeleteतुम्हारे जिंदगी के खुशगवार बदलावों के लिए शुभकामनाएं...आती रहा करो!
oye yaara.......... !
ReplyDeleteNaye saal ki dheron-dheron mubarakbaad ! Khuda tujhe muskurahaton ki lambi ladiyan bakshe !
Stay blessed n Keep smiling !
mujhe laga yahan bhi kuch naya padhne ko milega... :(
ReplyDeletebahut hi bhavpurn
ReplyDeletehttp://kuchmerinazarse.blogspot.in/2012/05/blog-post_08.html
ReplyDeleteरश्मि दी ने आपकी ये पुरानी पोस्ट पढवाई................
ReplyDeleteआप दोनों का शुक्रिया...
अनु